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शिक्षा शासन के नियमों पर लगा ताला, संकुल प्रभारी भीमसेन को बचाने प्रधान पाठकों ने स्वयं बनाए नियम – उच्च अधिकारियो की चुपी पर सवालो की गठरी बँधी है।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। मरवाही विकासखण्ड के संकुल केंद्र बंसीतल में शिक्षा विभाग की मनमानी का मामला सामने आया है। वर्षों से बंद पड़े संकुल केंद्र की शिकायत प्रकाशित होने के बाद जब अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया, तो कार्रवाई से बचाने के लिए संकुल प्रभारी भीमसेन पर लगे आरोपों को दरकिनार कर दिया गया। बताया जा रहा है कि प्रधान पाठक ने शिक्षा शासन के नियमों को किनारे रखते हुए स्वयं के बनाए नियम लागू कर दिए। अगर शिक्षा विभाग की नियम की गठजोड़ ढीला होगा तो कल कोई भी शासकीय शिक्षक अपने निजी आवास में स्कूल चलाने लगेगा। यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इस मामला से शिक्षा जगत में नाराजगी का माहौल है। सवाल उठ रहा है कि क्या शासन के नियम केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं..? आखिर एक शिक्षा विभाग द्वारा जारी शासन के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद संकुल स्तर पर मनमानी की जा रही है। आरोप है कि संकुल प्रभारी भीमसेन की जिम्मेदारी को बचाने प्रधान पाठकों ने शासन के विपरीत निर्णय लेते हुए अपनी सुविधा अनुसार नए नियम बना लिए। शिक्षकों का कहना है कि यदि शासन के नियमों का पालन नहीं किया जाएगा, तो विभाग की साख पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होंगे। नियमों की धज्जियां उड़ाने से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी और मनमानी करने वालों का हौसला और बढ़ेगा। स्थानीय लोगों व शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी नियमों को दरकिनार कर अपने हिसाब से फैसले न ले सके।

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